संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds) का बदलता वैश्विक परिदृश्य
जानिए कैसे सरकारी निवेश कोष पश्चिमी ट्रेजरी बॉन्ड से हटकर महत्वपूर्ण खनिजों, कृषि भूमि और हरित प्रौद्योगिकियों (Green Tech) की ओर रुख कर रहे हैं।
कुंदन पांडेय ·
## सरकारी पूंजी का नया खेल
पिछले चालीस वर्षों से, दुनिया के सबसे बड़े संप्रभु धन कोष निष्क्रिय संस्थागत निवेशकों के रूप में कार्य कर रहे थे। वे अपने तेल राजस्व और व्यापार अधिशेष को मुख्य रूप से अमेरिकी ट्रेजरी बिलों और यूरोपीय शेयरों में निवेश करते थे।
लेकिन अब वह दौर समाप्त हो चुका है। भू-राजनीतिक बदलावों से प्रेरित होकर, राज्य के कोष तेजी से अपनी पूंजी का उपयोग रणनीतिक संपत्तियों और उन क्षेत्रों में कर रहे हैं जो उनकी आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
> "संप्रभु धन अब केवल वित्तीय लाभ के बारे में नहीं है—यह राष्ट्रीय लचीलेपन, खाद्य सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकी स्वामित्व के बारे में है।"
![वित्तीय बाजार के ग्राफ]()
### खनिज और कृषि भूमि पर ध्यान
लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements) आज के युग के नए सोने के रूप में उभर रहे हैं। सरकारी कोष भविष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खनन कंपनियों के साथ सीधे दीर्घकालिक समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।
इसके साथ ही, विकासशील देशों में कृषि योग्य भूमि की खरीद भी बढ़ रही है। ये रणनीतिक निवेश जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा होने वाली खाद्य असुरक्षा से निपटने की तैयारी का हिस्सा हैं।